केवल क्रूस में घमण्ड करना


पर ऐसा न हो, कि मैं और किसी बात का घमण्ड करूं, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का जिस के द्वारा संसार मेरी दृष्टि में और मैं संसार की दृष्टि में क्रूस पर चढ़ाया गया हूं।

आपका जीवन, संसार में एक चिरस्थायी अन्तर लाये, इसके लिए आपको बहुत सी चीजें जानने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन अवश्य है कि आप कुछ बड़ी बातों को जानें जो महत्वपूर्ण हैं, और तब उनके लिए जीने और उनके लिए मरने को इच्छुक रहें। वे लोग जो संसार में एक दीर्घकालिक अन्तर लाते हैं, ऐसे लोग नहीं हैं जो बहुत सी चीजों के विशेषज्ञ हैं, अपितु वे जिन्होंने कुछ महान् चीजों में सिद्धता हासिल की है। यदि आप चाहते हैं कि आपकी जिन्दगी को महत्व मिले, यदि आप चाहते हैं कि आपके कंकड़ गिराने से बनी छोटी लहर, वे ऊंची लहरें बन जावें जो पृथ्वी के छोर तक पहुंचें और सदियों के लिए और सनातनकाल में उठती रहें, तो आपके पास उच्च ‘आई. क्यू.’ (बौद्धिक स्तर) अथवा ‘ई. क्यू.’ होने की आवश्यकता नहीं है; आपको आकर्षक दिखने या धनी होने की आवश्यकता नहीं है; आपको एक अच्छे परिवार से आने या एक अच्छे स्कूल से पढ़े-लिखे होने की आवश्यकता नहीं है। आपको कुछ महान्, भव्य, अपरिवर्तनीय, सुस्पष्ट, सरल, महिमामय चीजों को जानना आवश्यक है, और उनके द्वारा जोश से भर जाने की आवश्यकता है।

लेकिन मैं जानता हूं कि इस भीड़ में से हर एक व्यक्ति नहीं चाहता कि आपका जीवन कोई अन्तर लावे। आप में से सैंकड़ों हैं--आप परवाह नहीं करते हैं कि आप किसी महान् चीज के लिए, कोई चिरस्थायी अन्तर लाते हैं या नहीं, आप मात्र ये चाहते हैं कि लोग आपको पसन्द करें। यदि लोग आपको मात्र पसन्द करें, आप सन्तुष्ट हो जाते हैं। अथवा, यदि आपके पास अच्छी नौकरी के साथ एक अच्छी पत्नी और दो अच्छे बच्चे हैं, और एक अच्छी कार और लम्बे सप्ताहाँत और थोड़े से अच्छे मित्र, एक आनन्ददायक सेवानिवृति, और एक शीघ्र व आसान मृत्यु और कोई नरक नहीं - यदि आप वो सब (सिवाय परमेश्वर के) पा सकते - आप सन्तुष्ट हो जाते हैं। योग्यता के अन्दर ये एक त्रासदी है।

तीन सप्ताह पूर्व हमें हमारी कलीसिया में समाचार मिला कि ‘रूबी एलियास़न’ और ‘लूरा एडवर्डस्’ दोनों कैमरून में मारे गए। ‘रूबी’ 80 से ऊपर की थी। आजीवन अविवाहित, उन्होंने अपनी जिन्दगी को एक महान् चीज के लिए उण्डेल दिया: जिन तक सुसमाचार नहीं पहुँचा, दरिद्र, और बीमार लोगों को यीशु मसीह से परिचित कराना। ‘लूरा’ एक विधवा थी, एक चिकित्सक, लगभग 80 साल की, और कैमरून में ‘रूबी’ के साथ-साथ सेवा करती थी। ब्रेक फेल हो गये, कार कग़ार से नीचे चली गयी, और वे दोनों तुरन्त मारी गयीं। और मैंने अपने लोगों से पूछा: क्या ये दुःखद घटना थी ? दो जिन्दगियाँ, एक महान् दर्शन के द्वारा चलायी गयीं, मसीह की महिमा के लिए, नाश होते दरिद्रों की अप्रचारित सेवा में खर्च हो गयीं-- दो दशक बाद उनके लगभग सभी अमेरिकी संगी-साथी, फ्लोरिडा या न्यू मैक्सिको में, खिलवाड़ में अपनी जिन्दगी खर्च करने के लिए सेवानिवृत हो गये हैं। नहीं। वो एक दुःखद घटना नहीं है। वो एक महिमा है।

मैं आपको बताता हूँ कि दुःखद घटना क्या होती है। मैं आपके लिए ‘रीडर्स डाइजेस्ट’ (फरवरी 2000, पृ. 98) से पढ़ता हूँ कि एक दुःखद घटना क्या होती है: ‘‘बॉब और पैनी … पाँच साल पहिले उत्तर-पूरब में अपनी नौकरी से समयपूर्व सेवानिवृत्ति ले लिये, जब वह 59 का और वो 51 की थी। अब वे ‘पुन्टा गोर्डा’, फ्लोरिडा, में रहते हैं, जहाँ वे अपनी 30 फुट लम्बी मछली पकड़ने की नाव में समुद्र में भ्रमण करते, सॉफ्ट-बॉल खेलते और सीपी एकत्र करते हैं।’’ अमेरिकी स्वप्न: अपनी जिन्दगी के अन्त पर आओ - तुम्हारी एक व एकमात्र जिन्दगी - और इससे पूर्व कि आप अपने सृष्टिकर्ता को हिसाब दें, ‘उसके’ सम्मुख अपना अंतिम महान् काम होने दें, ‘‘मैंने सीपी एकत्र की हैं। मेरी सीपियाँ देखिये।’’ ये है एक दुःखद घटना। और आज लोग करोड़ों डॉलर खर्च कर रहे हैं कि आपको फुसला सकें कि आप उस दुःखान्त स्वप्न को गले लगा लें। और मेरे पास चालीस मिनिट हैं कि आपसे याचना करूं कि: इसे मत खरीदिये।

अपनी जिन्दगी को व्यर्थ मत जाने दीजिये। ये कितनी छोटी और कितनी बहुमूल्य है। मैं ऐसे घर में पला-बढ़ा हूँ, जहाँ मेरे पिता ने खोये हुओं तक सुसमाचार लाने के लिए एक सुसमाचार-प्रचारक के रूप में अपने-आप को पूरी तरह खर्च कर दिया। उनके पास, अपने में समा लेने वाला, एक ही दर्शन था: सुसमाचार का प्रचार करो। मेरी बड़े होने के पूरे वर्षों तक एक तख्ती हमारे किचिन में टंगी रहती थी। अब वो हमारे बैठक-कक्ष में टंगी है। मैं 48 वर्षों से लगभग प्रतिदिन इसकी ओर देखा है। ये कहती है, ‘‘केवल एक जीवन, ये शीघ्र ही बीत जायेगा। जो मसीह के लिए किया गया, केवल वही रह जायेगा।’’

मैं यहाँ ‘वन डे’ में, एक पिता के रूप में हूँ। मैं 54 साल का हूँ। मेरे चार पुत्र और एक पुत्री है: ‘कस्र्टन’ 27 का, बैन्जामिन 24 का, अब्राहम 20 का, बरनबास 17 का है। तलीथा 4 साल की है। मेरे वयस्क बेटे अपनी जिन्दगियाँ विनाशक सफलता के लिए व्यर्थ न गंवायें, इस लालसा की तुलना में थोड़ी ही बातें हैं, यदि कोई है तो, जो इन महीनों व वर्षों में मुझे इससे अधिक लालसा से भरती हैं।

अतः मैं आपको बेटों और बेटियों के रूप में देखते हुए, एक पिता के रूप में आपसे याचना करता हूँ - शायद ऐसा पिता आपके पास कभी नहीं था। अथवा ऐसा पिता जिसके पास आपके लिए एक ऐसा दर्शन नहीं था, जैसा कि मेरे पास आपके लिए है और परमेश्वर के पास आपके लिए है। अथवा, एक ऐसा पिता जिसके पास आपके लिए दर्शन है, किन्तु ये सब केवल पैसा और प्रतिष्ठा के बारे में है। मैं आप लोगों को बेटों और बेटियों के रूप में देखता हूँ और मैं आपसे याचना करता हूँ: चाहता हूँ कि आपकी जिन्दगियाँ कुछ महान् चीज के लिए और सनातन के लिए गिनी जावें। ये चाहता हूँ। बिना एक धुन के अपनी जिन्दगी न बितायें।

‘पैशन 98’ और ‘पैशन 99’ और ‘वन डे’ के दर्शन से, मेरे प्रेम करने के कारणों में से एक है कि, 268 उद्घोषणा इतनी सुस्पषट है जिसके विषय में मेरी जिन्दगी है। उद्घोषणा, यशायाह 26: 8 पर आधारित है - ‘‘हे यहोवा, तेरे न्याय के मार्ग में हम लोग तेरी बाट जोहते आये हैं ; तेरे नाम के स्मरण की हमारे प्राणों में लालसा बनी रहती है।’’ यहाँ मात्र एक शरीर नहीं है अपितु एक प्राण। यहाँ मात्र एक प्राण नहीं है, अपितु एक धुन और एक लालसा के साथ एक प्राण है। यहाँ मात्र पसन्द किये जाने की या सॉफ्ट-बॉल और सीपियों की लालसा नहीं है, यहाँ, अत्याधिक महान्, और अपरिमेय सुन्दर, और असीम मूल्यवान् और अनन्त सुन्तुष्टि देने वाली किसी चीज की लालसा है - परमेश्वर का नाम और महिमा - ‘‘तेरा नाम और तेरी कीर्ति, हमारे प्राणों की लालसा है’’ (अंग्रेजी से सही अनुवाद)।

यही जानने के लिए मैं जीवित हूँ और अनुभव करने की प्रतीक्षा करता हूँ। मेरे जीवन और जिस कलीसिया में मैं सेवा करता हूँ उसका ‘जीवन-लक्ष्य कथन’: ‘‘हम विद्यमान हैं - मैं विद्यमान हूँ - सभी लोगों के आनन्द के लिए सभी चीजों में परमेश्वर के आधिपत्य के लिए, एक धुन को फैलाना।’’

आपको इसे वैसा नहीं कहना पड़ेगा जैसा कि मैं इसे कहता हूँ। आपको इसे वैसा नहीं कहना पड़ेगा जैसा ‘लुई गिगलियो’ इसे कहता है (या जैसा ‘बेथ मूर’ इसे कहता है या जैसा ‘वूडी बॉकम’ इसे कहता है)।

लेकिन जो भी आप करते हैं, इसे कहने के लिए अपनी धुन खोजिये और अपना रास्ता खोजिये और इसके लिए जीवित रहिये और इसके लिए मर जाइये। और आप एक ऐसा अन्तर ले आयेंगे जो बना रहेगा। आप पौलुस प्रेरित के समान होंगे। किसी और के पास अपने जीवन के लिए एक अधिक एकनिष्ठ दर्शन नहीं था जैसा कि पौलुस के पास। वह इसे विभिन्न तरीकों से कह सकता था।

प्रेरित 20: 24:- ‘‘परन्तु मैं अपने प्राण को कुछ नहीं समझता: कि उसे प्रिय जानूं, बरन यह कि मैं अपनी दौड़ को, और उस सेवकाई को पूरी करूं, जो मैं ने परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार पर गवाही देने के लिये प्रभु यीशु से पाई है।’’

एक चीज का महत्व था: मुझे सौंपा गया काम पूरा करूं, मेरी दौड़ दौड़ूं।

फिलिप्पियों 3: 7-8:- ‘‘परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। बरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं।’’

मैं कैसे आपकी सहायता करूं ? मैं इस ‘वन डे’ के इस एक क्षण में परमेश्वर द्वारा कैसे उपयोग हो सकता हूँ कि आप में एक एकमात्र महान् वास्तविकता के लिए, एक एकमात्र धुन जागृत करूं जो आपको स्वतंत्र करे और आपको छोटे स्वप्नों से मुक्त करे और आपको पृथ्वी के छोरों तक भेजे ?

उत्तर, जो मैं सोचता हूँ कि प्रभु ने मुझे दिया, ये था:- उन्हें धर्मशास्त्र की एक आयत तक ले जाओ जो उस केन्द्र के अधिकतम निकट है जितना तुम जा सकते हो और उन्हें दिखाओ कि पौलुस ने वहाँ क्यों कहा, जब वह कहता है:-

आयत गलतियों 6: 14 है:- ‘‘पर ऐसा न हो, कि मैं और किसी बात का घमण्ड करूं, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का जिस के द्वारा संसार मेरी दृष्टि में और मैं संसार की दृष्टि में क्रूस पर चढ़ाया गया हूं।’’

अथवा इसे सकारात्मक रूप में बयान करने के लिए:- केवल यीशु मसीह के क्रूस में घमण्ड कीजिये। यह एक एकमात्र योजना है। एक एकमात्र लक्ष्य। एक एकमात्र धुन। केवल क्रूस में घमण्ड कीजिये। इस शब्द का अनुवाद किया जा सकता है, ‘‘में उल्लासित’’ अथवा ‘‘में आनन्दित’’। केवल मसीह के क्रूस में उल्लासित रहिये। केवल मसीह के क्रूस में आनन्दित रहिये। पौलुस कहता है कि इसे आपकी एकमात्र धुन बने रहने दीजिये, आपका एकमात्र घमण्ड, और आनन्द और उल्लास। इस महान् क्षण में जो ‘वन डे’ कहलाता है, होने दीजिये कि वो एक चीज जिससे आप प्रेम करते हैं, वो एक चीज जिसे आप संजोते हैं, वो एक चीज जिस में आप आनन्दित होते हैं और जिस पर उल्लासित होते हैं, यीशु मसीह का क्रूस हो।

दो कारणों से, ये चैंकाने वाला है।

1) एक ये है कि ये ऐसा कहने के समान है: केवल इलेक्ट्र्कि चेयर (विद्युत-कुर्सी) में घमण्ड कीजिये। केवल गैस-कक्ष में उल्लासित होइये। केवल प्राणघातक इन्जेक्शन में आनन्दित होइये। आपके एक घमण्ड और एक आनन्द और एक उल्लास को फांसी की रस्सी होने दीजिये। ‘‘पर ऐसा न हो, कि मैं और किसी बात का घमण्ड करूं, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का।’’ प्राणदण्ड का कोई और तरीका जो कभी अविश्कार किया गया था, क्रूस पर कीलों से जड़ दिये जाने से अधिक कठोर और यंत्रणा देने वाला नहीं था। ये भयंकर था। बिना चिल्लाये और अपने बालों को नोंचे और अपने कपड़ों को फाड़े - आप इसे देख नहीं सकते थे। इसे अपने जीवन की एकमात्र धुन होने दीजिये।

2) ये एक चीज है जो पौलुस के शब्दों के बारे में चैंकाने वाली है। दूसरी ये है कि वह कहता है कि केवल यही आपके जीवन का घमण्ड होना है। एकमात्र आनन्द। एकमात्र उल्लास। ‘‘पर ऐसा न हो, कि मैं और किसी बात का घमण्ड करूं, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का।’’

इससे उसका क्या अर्थ है ? वास्तव में ? कोई और घमण्ड नहीं ? कोई और उल्लास नहीं ? कोई और आनन्द नहीं, यीशु के क्रूस के सिवाय - यीशु की मृत्यु के सिवाय ?

उन स्थानों के बारे में क्या, जहाँ पौलुस स्वयँ, अन्य चीजों के लिए वही शब्द ‘‘घमण्ड’’ या ‘‘उल्लास’’ उपयोग करता है ? उदाहरण के लिए:

रोमियों 5: 2:- ‘‘परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें।’’

रोमियों 5: 3, 4:- ‘‘केवल यही नहीं, बरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है।’’

2 कुरिन्थियों 12: 9:- ‘‘मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करूंगा।’’

1 थिस्सलुनिकियों 2: 19:- ‘‘हमारी आशा, या आनन्द या बड़ाई का मुकुट क्या है ? क्या … तुम ही न होगे ?’’

तो, यदि पौलुस इन सब बातों में घमण्ड व उल्लास कर सकता है, तब पौलुस का क्या अर्थ है - कि वह ‘‘ऐसा न हो किसी बात का घमण्ड करे, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का’’ ?

लेकिन उसका क्या अर्थ है ? क्या यह मात्र दोमुही बातचीत है ? आप एक बात में उल्लासित होते हैं और कहते हैं कि आप किसी अन्य बात में उल्लासित हो रहे हैं ? नहीं। एक बहुत गूढ़ कारण है ये कहने के लिए - कि किसी भी चीज में सभी उल्लास, सभी आनन्द, सभी धमण्ड करना, यीशु मसीह के क्रूस में आनन्द करना होना चाहिए।

उसका अर्थ यह है कि, एक मसीही के लिए, सभी अन्य घमण्ड, क्रूस में घमण्ड करना भी होना चाहिए। किसी भी अन्य चीज में सब प्रकार का उल्लास, क्रूस में उल्लास रहना चाहिए। यदि आप महिमा की आशा में उल्लासित रहते हैं तो आपको मसीह के क्रूस में उल्लासित रहना चाहिए। यदि आप क्लेशों में घमण्ड करते हैं क्योंकि क्लेश से आशा उत्पन्न होती है तो आपको मसीह के क्रूस में घमण्ड करना चाहिए। यदि आप अपनी दुर्बलताओं में घमण्ड करते हैं, या परमेश्वर के लोगों में, तो आपको मसीह के क्रूस में घमण्ड करना चाहिए।

मामला ये क्यों है ? इस कारण से:- छुटकारा पाये हुए पापियों के लिए, हर एक भली चीज - निःसंदेह हर एक बुरी चीज, जो परमेश्वर भली में बदल देता है - हमारे लिए मसीह के क्रूस के द्वारा प्राप्त की गई थी। मसीह की मृत्यु से हटकर, पापियों को और कुछ नहीं वरन् ईश्वरीय-दण्ड मिलता है। मसीह के क्रूस से हटकर, केवल दण्डाज्ञा है। इसलिए हर एक चीज जो आप मसीह में उपभोग करते हैं - एक मसीही के रूप में, एक व्यक्ति के रूप में जो मसीह का भरोसा करता है - मसीह की मृत्यु के कारण है। और इसलिए सब बातों में आपका सभी प्रकार से आनन्दित होना, क्रूस में आनन्दित होना रहना चाहिए जहाँ आपकी सभी आशीषें, आपके लिए परमेश्वर के पुत्र, यीशु मसीह की मृत्यु की कीमत पर खरीदी गई थीं।

उन कारणों में से एक, कि हम उतना मसीह-केन्द्रित और क्रूस-संतृप्त नहीं हैं जितना कि हमें होना चाहिए, ये है कि हमने ये स्पष्ट रूप से अनुभव नहीं किया है कि हर एक चीज - हर भली चीज और हर बुरी चीज जो परमेश्वर, उसके छुटकारा पाये हुए बच्चों के लिए भली में बदल देता है, हमारे लिए मसीह की मृत्यु के द्वारा खरीदी गई थी। हम, जिन्दगी और श्वास और स्वास्थय और मित्रों और हर एक चीज को, सरलता से सुनिष्चित मान लेते हैं। हम सोचते हैं कि ये हमारा अधिकार है । किन्तु तथ्य ये है कि यह अधिकार के द्वारा हमारा नहीं हैं।

हम दोगुने तौर पर इसके अपात्र हैं।

1) हम सृष्टि हैं और हमारा सृष्टिकर्ता बाध्य या वचनबद्ध नहीं था कि हमें कुछ भी दे - जिन्दगी या स्वास्थय और कुछ भी नहीं। ‘वह’ देता है, ‘वह’ ले लेता है, और ‘वह’ हमारे साथ कुछ अन्याय नहीं करता।

2) और अपने सृष्टिकर्ता पर बिना किसी दावे के, सृजित प्राणी होने के अलावा, हम पापी हैं। हम ‘उसकी’ महिमा से रहित हैं। हमने ‘उसे’ अनदेखा किया और ‘उसकी’ आज्ञा का उल्लंघन किया और ‘उसे’ प्रेम करने व विश्वास करने में असफल रहे हैं। ‘उसके’ न्याय का क्रोध हमारे विरुद्ध भड़क गया है। हम ‘उस’ से जिस भी चीज की पात्रता रखते हैं वो है न्याय। इसलिए हर एक श्वास जो हम लेते हैं, हर बार जब हमारा दिल धड़कता है, प्रतिदिन जो सूरज ऊगता है, हर क्षण जो हम अपनी आँखों से देखते या हमारे कानों से सुनते हैं या अपने मुँह से बोलते हैं या अपने पैरों से चलते हैं, पापियों के लिए मुफ्त और अनर्जित वरदान/उपहार है, जो केवल ईश्वरीय-दण्ड की पात्रता रखते हैं।

और ये वरदान हमारे लिए किसने खरीदा ? यीशु मसीह ने। और ‘उसने’ इन्हें किस तरह खरीदा ? ‘अपने’ लोहू के द्वारा।

जीवन में प्रत्येक आशीष, मसीह के क्रूस को आवर्धित करने के उद्देश्य से है, या इसे दूसरे ढंग से कहें, जीवन में हर एक अच्छी चीज, मसीह को और उसे क्रूसघातित होने को बड़ा बनाने के लिए है। अतः, उदाहरण के लिए, पिछले सप्ताह हमारी 1991 की ‘डॉज़ स्पिरिट’ कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई, लेकिन किसी को चोट नहीं लगी। और उस सुरक्षा में मैं उल्लासित हूँ। मैं उसमें घमण्ड करता हूँ। लेकिन क्यों किसी को चोट नहीं लगी ? वो मेरे और मेरे परिवार के लिए एक वरदान था, जिसे पाने का हम में से कोई भी पात्र नहीं है। हम पापी हैं और मसीह से हटकर, स्वभाव से ही क्रोध की सन्तान हैं। तो कैसे हमें हमारे भले के लिए ऐसा वरदान मिला ? उत्तर:- मसीह हमारे पापों के लिए क्रूस पर मरा, और हमारे ऊपर से परमेश्वर के क्रोध को हटा दिया, और हमारे लिए परमेश्वर का सर्वशक्तिमान् अनुग्रह सुरक्षित कर दिया, जो सब बातों में, मिलकर हमारे लिए भलाई उत्पन्न करता है, हालांकि हम इसकी योग्यता नहीं रखते, फिर भी। अतः जब मैं अपनी सुरक्षा में उल्लासित होता हूँ, मैं मसीह के क्रूस में उल्लासित हो रहा हूँ।

और उस कार के लिए बीमा कम्पनी ने हमें 2800 डॉलर चुकाया और ‘नोएल’ ने उस पैसे को लिया और ‘आइओवा’ को गया और एक ‘92 शेवी ल्यूमिना’ खरीदा और बर्फबारी में उसे घर तक चला के लाया। और अब हमारे पास पुनः एक कार है। और मैं इतने अधिक उदार दान के अद्भुत अनुग्रह में फूले नहीं समाता। ठीक उसी प्रकार। आप अपनी कार को क्षतिग्रस्त कर लेते हैं। आप बिना चोट के बाहर आ जाते हैं। बीमा पैसे चुकाता है। आप को दूसरी मिल जाती है। और ऐसे आगे बढ़ जाते हैं मानो कुछ भी नहीं हुआ था। और धन्यवाद में मैं अपना सिर झुकाता हूँ और यहाँ तक कि इन छोटी पदार्थी चीजों की अनकही दयाओं में उल्लासित होता हूँ। ये सारी दयाएँ कहाँ से आती हैं ? यदि आप एक उद्धार पाये हुए पापी हैं, यीशु में एक विश्वासी, तो वे क्रूस के द्वारा आती हैं। क्रूस से हटकर, केवल न्याय है - एक समय तक धीरज और दया, किन्तु उसके बाद, यदि ठुकराये गए, वो सभी दया, केवल न्याय को भड़काने का काम करती है। इसलिए हर एक वरदान, लोहू से खरीदा हुआ वरदान है। और सब प्रकार का घमण्ड करना - सभी उल्लास - क्रूस में घमण्ड करना है।

मुझ पर हाय, यदि मैं किसी आशीष में उल्लास करता हूँ जब तक कि मेरा उल्लासित होना मसीह के क्रूस में उल्लासित होना नहीं है।

इसे कहने का दूसरा तरीका ये है कि क्रूस की उद्देश्य, मसीह की महिमा है। क्रूस में परमेश्वर का लक्ष्य ये है कि मसीह सम्मानित हो। जब पौलुस गलतियों 6: 14 में कहता है, ‘‘पर ऐसा न हो, कि मैं और किसी बात का घमण्ड करूं, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का,’’ वह कह रहा है कि परमेश्वर की इच्छा ये है कि क्रूस सदैव आवर्धित किया जावे - कि क्रूसघातित मसीह सदा हमारा घमण्ड और उल्लास और हमारा आनन्द और हमारी स्तुति बना रहे - कि मसीह को हमारे जीवन की हर भली चीज में महिमा और धन्यवाद और आदर मिले - और हर एक बुरी चीज में भी जिसे परमेश्वर भली में बदल देता है।

लेकिन अब यहाँ एक प्रश्न है:- मसीह की मृत्यु में यदि परमेश्वर का यही लक्ष्य है - यथा, कि ‘‘क्रूसधातित मसीह’’ सभी चीजों के लिए सम्मानित और महिमित किया जावे, तब मसीह को वो महिमा कैसे मिलेगी जिसकी पात्रता ‘वह’ रखता है ? उत्तर ये है कि बच्चों और जवानों और वयस्कों को यह सिखाया जाना है कि ये चीजें ऐसी हैं। अथवा इसे दूसरे ढंग से कहें:- मसीह के क्रूस में घमण्ड का स्रोत, मसीह के क्रूस के विषय में शिक्षा है।

ये है मेरा काम:- आपको ये बातें सिखाने के द्वारा यीशु के लिए महिमा प्राप्त करूं। और तब आपका काम है कि उन पर चलने के द्वारा और उन्हें और अधिक लोगों को सिखाने के द्वारा, यीशु के लिए और महिमा प्राप्त करें। यीशु के बारे में शिक्षा, यीशु में घमण्ड करने के लिए है। और यदि हम चाहते हैं कि क्रूस के सिवाय और किसी में उल्लास न हो, तब हमें क्रूस के बारे में - और क्रूस के तले - शिक्षा में लगे रहना चाहिए।

अथवा हमें यह कहना चाहिए, ‘‘क्रूस पर।’’ क्रूस पर शिक्षा, क्रूस पर घमण्ड की ओर ले जायेगा। मेरे कहने का क्या अर्थ है?

पद 14 के शेष भाग को देखें:- ‘‘पर ऐसा न हो, कि मैं और किसी बात का घमण्ड करूं, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का जिस के द्वारा संसार मेरी दृष्टि में और मैं संसार की दृष्टि में क्रूस पर चढ़ाया गया हूं।’’ क्रूस में घमण्ड तब होता है जब आप क्रूस पर होते हैं। क्या पद 14 यही नहीं कहती है ? संसार मेरी दृष्टि में क्रूस पर चढ़ाया गया है और मैं संसार की दृष्टि में क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ। संसार मेरे लिए मर गया है और मैं संसार के लिए मर गया हूँ। क्यों ? क्योंकि मैं क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ। जब हम क्रूस पर होते हैं तब हम क्रूस पर घमण्ड करना और क्रूस पर उल्लासित होना सीखते हैं।

अब इसका क्या अर्थ है ? ये कब हुआ ? आप कब क्रूस पर चढ़ाये गए ? उत्तर गलातियों 2: 20 में है, ‘‘मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिस ने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।’’ जब मसीह मरा, हम मर गए। मसीह की मृत्यु का महिमित अर्थ ये है कि जब ‘वह’ मरा, ‘उसके’ सभी अपने ‘उसमें’ मर गए। वो मृत्यु, जो ‘वह’ हम सब लिए मरा, हमारी मृत्यु बन जाती है जब हम विश्वास के द्वारा मसीह से संयुक्त हो जाते हैं।

किन्तु आप कहते हैं, ‘‘क्या मैं जिन्दा नहीं हूँ ? मैं जिन्दा महसूस करता हूँ।’’ तो, यहां पर शिक्षाण की एक आवश्यकता है। हमें अवश्य ही सीखना चाहिए कि हमें क्या हुआ। हमें ये बातें अवश्य ही सिखाया जाना चाहिए। इसी कारण गलातियों 2: 20 और 6: 14 बाइबल में हैं। परमेश्वर हमें सिखा रहा है कि हमें क्या हुआ, ताकि हम अपने आप को जान सकें और हमारे साथ कार्य करने की ‘उसका’ तरीका जान सकें और जैसा कि हमें होना चाहिए ‘उसमें’ और ‘उसके’ पुत्र में और ‘उसके’ क्रूस में उल्लासित हों।

अतः हम पुनः गलातियों 2: 20 को पढ़ते हैं, ये देखने के लिए कि, हाँ, हम मर गए हैं और हाँ, हम जिन्दा हैं। ‘‘मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, (अतः मैं मर गया हूं, और वह कहता जाता है); और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है (क्यों ? क्योंकि मैं मर गया, अर्थात् मेरा पुराना विद्रोही, अविश्वासी मनुष्यत्व मर गया, और वह कहता जाता है); और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं (अतः, हाँ, मैं जिन्दा हूँ, परन्तु ये वही ‘‘मैं’ नहीं है, जैसा कि वो ‘‘मैं’ जो मर गया) तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिस ने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।’’ दूसरे शब्दों में, ‘‘मैं’’ जो जीवित है, विश्वास का नया ‘‘मैं’’ है। नयी सृष्टि जीवित रहती है। विश्वासी जीवित रहता है। पुराना मनुष्यत्व यीशु के साथ क्रूस पर मर गया।

और यदि आप पूछें, ‘‘इस वास्तविकता से जुड़ने की कुंजी क्या है ? ये मेरा कैसे हो सकता है ? उत्तर, गलातियों 2: 20 में विश्वास के बारे में शब्दों में समाविष्ट है। ‘‘मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है।’’ ये है जुड़ाव। परमेश्वर आपको विश्वास के द्वारा ‘उसके’ पुत्र से जोड़ता है। और जब ‘वह’ ऐसा करता है, वहाँ परमेश्वर के पुत्र के साथ एक संयुक्तता है ताकि ‘उसकी’ मृत्यु आपकी मृत्यु बन जाती है और ‘उसका’ जीवन आपका जीवन बन जाता है।

अब इस सब को गलतियों 6: 14 पर ले चलिये, ‘‘पर ऐसा न हो, कि मैं और किसी बात का घमण्ड करूं, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का जिस के द्वारा संसार मेरी दृष्टि में और मैं संसार की दृष्टि में क्रूस पर चढ़ाया गया हूं।’’ क्रूस के सिवाय और किसी चीज में घमण्ड मत कीजिये।

और कैसे मैं इतना मूलतः क्रूस-केन्द्रित बन सकता हूँ - ताकि मेरे सभी उल्लास या आनन्द का सम्बन्ध क्रूस से हो ? उत्तर:- पूर्ण रूप से समझिये कि जब मसीह क्रूस पर मरा, आप मर गए; और जब आपने ‘उस’ पर विश्वास किया, वो मृत्यु आपके जीवन में प्रभावकारी हुई। पौलुस कहता है, यह संसार के लिए आपकी मृत्यु और आपके लिए संसार की मृत्यु है।

अर्थ:- जब आप मसीह में अपना विश्वास रखते हैं, संसार के प्रति आपकी बन्धुआई टूट जाती है, और संसार का अभिभूत करने वाला प्रलोभन टूट जाता है। संसार के लिए आप एक शव हैं, और संसार आपके लिए एक लाश है। अथवा इसे सकारात्मक रूप में रखने के लिए, पद 15 के अनुसार, आप एक ‘‘नयी सृष्टि’’ हैं। पुराना ‘आप’ मरा हुआ है। एक नया ‘आप’ जीवित है। और वो नया ‘आप’, विश्वास का ‘आप’ है। और विश्वास जिसमें उल्लासित होता है, वो संसार नहीं, अपितु मसीह है, और विशेषतया क्रूसित मसीह।

इस प्रकार से आप इतना अधिक क्रूस-केन्द्रित बन जाते हैं कि आप पौलुस के साथ कहते हैं, ‘‘मैं और किसी बात का घमण्ड नहीं करूंगा, सिवाय हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस में।’’ संसार अब आगे को मेरा धन नहीं है। ये मेरे जीवन और मेरी सन्तुष्टि और मेरे आनन्द का स्रोत नहीं है। मसीह है।

लेकिन कार दुर्घटना में सुरक्षा के बारे में क्या ? इंश्योरेन्स के भुगतान के बारे में क्या ? क्या आपने नहीं कहा कि आप इस बारे में खुश थे ? क्या वो संसार नहीं है ? तो क्या आप संसार के लिए मर गए हैं ?

मैं हो सकता था। मैं ऐसी आशा करता हूँ। क्योंकि संसार के लिए मृत हो जाने का अर्थ, संसार से बाहर चले जाना नहीं है। और इसका ये अर्थ नहीं कि संसार की चीजों के बारे में - कुछ नकारात्मक और कुछ सकारात्मक - महसूस नहीं करना है (1 यूहन्ना 2: 15; 1 तीमुथियुस 4: 3)। इसका अर्थ है कि संसार में प्रत्येक वैध सुख, मसीह के प्रेम का एक लोहू-खरीदा प्रमाण बन जाता है, और क्रूस में घमण्ड करने का एक अवसर। हम इंश्योरेन्स के भुगतान के प्रति मृत हैं जब पैसा वो चीज नहीं है जो हमें सन्तुष्ट करती है, अपितु क्रूसित मसीह, ‘प्रदान करने वाला’, सन्तुष्ट करता है। जब हमारा हृदय, आशीष की किरण के साथ, क्रूस में विद्यमान स्रोत की ओर, वापिस दौड़ता है, तब आशीष की सांसारिकता मृत हो जाती है, और क्रूसित मसीह ही सब कुछ होता है।

क्रूस में - उल्लासित होने के लिए शिक्षा का यही लक्ष्य है। ओ, परमेश्वर हमें मसीह व क्रूसित मसीह की महिमा के लिए स्वप्न देखने और योजना बनाने और कार्य करने और देने और सिखाने और जीने की शक्ति प्रदान करे !