परमेश्वर के अनुग्रह द्वारा सम्भाले गए

परन्तु अब इस्राएल का परमेश्वर यहोवा इस नगर के विषय में, जिसके लिये तुम लोग कहते हो कि वह तलवार, महंगी और मरी के द्वारा बाबुल के राजा के वश में पड़ा हुआ है यों कहता हैः देखो, मैं उनको उन सब देशों से जिनमें मैं ने क्रोध और जलजलाहट में आकर उन्हें बरबस निकाल दिया था, लौटा ले आकर इसी नगर में इकट्ठे करूंगा, और निडर करके बसा दूंगा। और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा। 39 मैं उनको एक ही मन और एक ही चाल कर दूंगा कि वे सदा मेरा भय मानते रहें, जिस से उनका और उनके बाद उनके वंश का भी भला हो। मैं उनसे यह वाचा बान्धूंगा, कि मैं कभी उनका संग छोड़कर उनका भला करना न छोडूंगा; और अपना भय मैं उनके मन मे ऐसा उपजाऊंगा कि वे कभी मुझ से अलग होना न चाहेंगे। मैं बड़ी प्रसन्नता के साथ उनका भला करता रहूंगा, और सचमुच उन्हें इस देश में अपने सारे मन और प्राण से बसा दूंगा।

सम्भालने वाला अनुग्रह क्या है?

परमेश्वर के सम्भालने वाले अनुग्रह की हम 125 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। यह क्या है? सम्भालने वाला अनुग्रह क्या है? मैं इसे चार पंक्तियों की एक कविता मॆं समझाना चाहूंगा -

वह अनुग्रह नहीं कि जो सच्चा आनन्द नहीं,
उसे रोके न ही समस्त संकटों से बचाए, परन्तु यह है,
वह अनुग्रह जो हमारे दुख-दर्द को नियोजित करता,
और तब, अन्धकार मॆं हमें सम्भालता है।

मैं इस पर ज़ोर देता हूं क्योंकि उस अनुग्रह के लिए धन्यवाद देना जो कि सच्चा आनन्द नहीं उसे रोके और समस्त दुख दर्द से बचाए रखे और हमारी पीड़ाओं को सहने की शक्ति न दे बाइबल के अनुसार नहीं है और अयथार्थ है।

. . . दुर्घटना में मरते-मरते बचे

हमारा अनुभव तथा बाइबल हमॆं यह सिखाती है कि अनुग्रह दुख दर्द को नहीं रोकता है, परन्तु हमारे दुख-दर्द को व्यवस्थित करता और सीमित करता है और तब अन्धकारपूर्ण समयों में हमें सम्भालता है। उदाहरण के लिए कल ही प्रभु के एक दास बैप्टिस्ट जनरल कान्फ्रेन्स के अध्यक्ष बॉब रिकर ने परमेश्वर के सम्भालने वाले अनुग्रह के विषय स्मरण दिलाया। लगभग दस वर्ष पूर्व बॉब और डी की बेटी एक कार दुर्घटना मॆं मरते मरते बचे। उनकी बेटी आज इसलिए जीवित है क्योंकि उनके पीछे वाली कार में एक डॉक्टर थे और उनकी जेब में एक एयर ट्यूब रखा था। वे कार से उतरे और देखा कि वह लड़की नीली पड़ रही थी। उन्होंने उस ट्यूब को उसके गले मॆं डाल दिया और उसे बचा लिया। कुछ वर्ष पश्चात उस बेटी का विवाह हुआ तब उसके पिता ने कहा – तुम्हारे चेहरे पर ये कुछ निशान जो हैं वे परमेश्वर के सम्भालने वाले अनुग्रह के चिन्ह हैं।

बॉअ रिकर मूर्ख नहीं हैं। वे जानते हैं कि यदि परमेश्वर उनके पीछे वाली कार में डॉक्टर को ठहरा सकता था, और कि इस डॉक्टर के पास सांस लेने वाली ट्यूब हो, और कि उसे तुरन्त यह समझ आए कि उस ट्यूब का उपयोग करना है, तब तो परमेश्वर उस दुर्घटना को होने से रोक सकता था। वास्तव मॆं, प्रभु के दास ने इफिसियों 1:11 को उद्धरत किया था, “उसी में जो अपनी इच्छा की सुमति के अनुसार सब कुछ करता है, हमने भी उसके अभिप्राय के अनुसार, पहिले से ठहराए जाकर उत्तराधिकार प्राप्त किया है ।” उन्होंने ज़ोर दिया कि, “सब कुछ का मतलब सबकुछ ” मैं सोचता हूं कार और हवाई जहाज और तीर और बन्दूक की गोली सहित सब कुछ पूर्वनियोजित है। मेरी लघु कविता की यही प्रॆरणा थी –“एक सम्भालने वाला अनुग्रह क्या है?”

वह अनुग्रह नहीं कि जो सच्चा आनन्द नहीं,
उसे रोके न ही समस्त संकटों से बचाए, परन्तु यह है,
वह अनुग्रह जो हमारे दुख-दर्द को नियोजित करता,
और तब, अन्धकार मॆं हमें सम्भालता है।

. . . जब वाहन ख़राब हो जाए

दो सप्ताह पहले नोएल और अब्राहाम और बरनबास और तलीता कार से जॉर्जिया की यात्रा कर रहे थे। इंडियाना पोलिस के दक्षिण में एक घण्टे बाद सुनसान रास्ते मॆं उनकी कार ख़राब हो गई। रेडियेटर गरम हो गया था, वह खराब हो गया। 50-55 वर्ष की उम्र का एक किसान जा रहा था। उसने रूककर सहायता करनी चाही। नोएल ने कहा कि उसे लगता है कि हमें किसी होटल में रुकना होगा और शायद सोमवार सुबह कोई गैरेज खुलने पर हमारी कार सुधारी जा सकेगी। उस किसान ने कहा, “क्या आप लोग मेरे और मेरी पत्नी के साथ रूकना चाहेंगे ?” नोएल कुछ हिचकिचाई, इससे पहले कि वह कुछ कह पाते उस किसान ने कहा, “प्रभु कहता है, जब हम दूसरॊं की सेवा करते हैं तो हम मानो उसकी सेवा करते हैं।” नोएल ने पूछा, “क्या आप सुबह हमें अपने साथ चर्च ले जा सकते हैं ?” किसान ने कहा, “यदि आपको बैप्टिस्ट चर्च जाने से कोई एतराज न हो।”

अतः वे उस किसान के घर पर ठहर गए, जो कि मैकेनिक भी था, और उसने कार की खराबी को समझ लिया, सोमवार को शहर गया, नया रेडिएटर लाया, कार सुधारा, और वह भी सब कुछ मुफ्त में, तब उस परिवार को विदा किया। इस बीच बरनबास ने अपना फिशिंग रॉड निकाला और एक बड़ी सी 19 इंच की केट मछली भी पकड़ी केक पर आइसिंग (सजावट) करने के लिये जो परमेश्वर नोएल की सहायता करने के लिए एक किसान को ठहरा सकता था और यह भी कि वह एक मसीही हो (चाहे बैप्टिस्ट क्यों न हो) और कि उसके यहां एक परिवार को ठहराने की व्यवस्था हो, और कि वह एक मैकेनिक हो, और कि वह सोमवार की सुबह सबसे पहले रेडिएटर लेने जाए, और कि अपना समय दे...,और उसके पास मछलियों से भरा टैंक हो। यह परमेश्वर सुनसान मार्ग पर रेडिएटर को फटने से अवश्य रोक सकता था।

. . . जब चंगाई नहीं मिलती है

परन्तु निरर्थकता के इस पतित संसार मॆं सम्भालने वाला अनुग्रह केवल यही नहीं करता है।

वह अनुग्रह जो कि जो सच्चा आनन्द नहीं है उसे रोके,
न ही समस्त संकटों से बचाए, परन्तु यह है
वह अनुग्रह जो हमारे दुख-दर्द को नियोजित करता
और तब, अन्धकार में हमें सम्भालता है।

हमारी कलीसिया का एक युवक इन दिनों कठिन समयों से होकर गुज़र रहा है। उसके विश्वास की कड़ी परीक्षा हो रही है। हाल ही में उसने मुझ से कहा – “यह अधिक सहज हुआ होता यदि यीशु ने चंगाई न दी होती वरन् चंगाई न होने पर सहने का अनुग्रह दिया होता।” मैंने उस युवक से कुछ यूं कहा – यीशु ने ठीक यही किया - और इसी कारण - 2 कुरिन्थियों 12:9-10 में परमेश्वर का अनुग्रह यह ठहराता है कि पौलुस को दीन रखने के लिए उसकी देह में एक कांटा रहे और तब प्रार्थना के उत्तर में वह कांटा दूर न किया जाए। परन्तु वह कहता है,

मेरा (सम्भालने वाला) अनुग्रह तेरे लिए पर्याप्त है, क्योंकि निर्बलता मॆं ही सामर्थ सिद्ध होती है।

जिसका उत्तर पौलुस देता है,

मैं सहर्ष अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करूंगा, जिस से कि मसीह का सामर्थ मुझ में निवास करॆं। इस कारण मैं मसीह के लिए निर्बलताओं, अपमानों, दुखों, सतावों और कठिनाइयों में प्रसन्न हूं, क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं तो सामर्थी होता हूं।

वह अनुग्रह नहीं कि जो सच्चा आनन्द नहीं,
उसे रोके न ही समस्त संकटों से बचाए, परन्तु यह है,
वह अनुग्रह जो हमारे दुख-दर्द को नियोजित करता,
और तब, अन्धकार मॆं हमें सम्भालता है।

. . . जब चर्च जल जाता है –

16 मार्च 1885, सोमवार के दिन जब 14 वर्ष पुराना बेतलहम बैपटिस्ट चर्च जो 12 वें मार्ग की 6वीं गली में स्थित था (जहाँ अब उगलस कम्पनी है) आग लगने से जल जाता है. और वह पूरी तरह नष्ट हो जाता है और उसकी मरम्मत नहीं हो पाती। परन्तु इस अन्धकारपूर्ण घटना मॆं परमेश्वर के अनुग्रह का एक अद्भुत कार्य भी था। छत के जिस हिस्से पर आग बुझाने वाले खड़े थे केवल वही एक नहीं गिरा था। और सात सप्ताह के भीतर ही कलीसिया ने सेकण्ड कॉन्ग्रिगेशनल चर्च का नया भवन खरीद लिया और 106 वर्षों तक वहां परमेश्वर की आराधना की जब तक कि 1991 में इस इमारत का काम पूरा नहीं हो गया।

जो परमेश्वर कमज़ोर छत के उस हिस्से को स्थिर रखने के द्वारा आग बुझाने वालों को बचा सकता है, जो सात सप्ताह के अन्दर एक नवीन तथा बेहतर भवन का प्रबन्ध कर सकता है, वह उस आग को लगने से भी रोक सकता था। आशा है बात स्पष्ट है।

हम परमेश्वर के सम्भालने वाले अनुग्रह का उत्सव मना रहे हैं।

वह अनुग्रह जो हमारे दुख-दर्द को नियोजित करता,
और तब, अन्धकार मॆं हमें सम्भालता है।

परमेश्वर विपत्ति से हमेशा नहीं बचाता है

यिर्मयाह 32 में हमारा पाठ इस सम्भालने वाले अनुग्रह के विषय मॆं है, और यह स्पष्ट करता है कि 125 वर्षों की विपत्तियॊं के पश्चात बेथलेहेम बैप्टिस्ट चर्च आज तक क्यों जीवित है। यरूशलेम और परमेश्वर की चुनी हुई प्रजा अन्धकार और संकट मॆं है। और स्वयं परमेश्वर ने यह किया है। पद 36 देखें: “इसलिए अब इस नगर के सम्बन्धमॆं जिसके लिए तुम कहते हो यह तो तलवार, अकाल और मरी के कारण बेबीलोन के राजा के हाथ में दे दिया गया है ।”

उसके विषय वे यही कहते हैं। और यह सच है। परमेश्वर ने उन्हें इस विपदा से नहीं बचाया, न ही परमेश्वर का अनुग्रह आपको आपकी नियुक्त विपदा से बचाएगा।

परन्तु परमेश्वर के चुने हुओं के विषय में वे जो कहते हैं वह निर्णायक नहीं है। परमेश्वर के पास वे अन्तिम वचन हैं। और वे अनुग्रह के वचन हैं। पद 37 “देखों, मैं उनको उन सब दे शॊं से जिनमें मैंने उन्हें अपने क्रोध, प्रकोप और जलजलाहट में खदेड़ दिया था इकट्ठा करके इस स्थान मॆं लौटा ले आऊंगा।” अतः परमेश्वर यह कहता है कि उसी ने संकट और दुख की आज्ञा दी हैं। “मैंने उन्हें खदेड़ दिया था।” और वह कहता है कि वह स्वयं उन्हें छुड़ाएगा और उन्हें अपने पास और उनके देश में लौटा ले आएगा। दूसरे शब्दों मॆं, विपत्ति पर अन्ततः परमेश्वर का सार्वभौम अनुग्रह ही विजयी होगा।

अनुग्रह की विजय के विषय हम कैसे सुनिश्चित हो सकते हैं?

अनुग्रह की विजय के विषय हम कैसे सुनिश्चित हो सकते हैं? यदि परमेश्वर सच्चा न्यायी है जो कि इस्त्राएल को विनाशकारी निर्वासन में भेज सकता है जहां अनेक लोग उनके पाप तथा अवज्ञा के कारण नाश हुए, तब हम दृढ़ता के साथ यह कैसे कह सकते हैं कि आज परमेश्वर के चुने हुओं -कलीसिया, मसीह की दुल्हन, सच्चे इस्त्राएल, आप और मैं, जो कि उसके पुत्र के साथ संगति में बुलाए गए हैं - के साथ ऐसा नहीं होगा? यह पूछना एक बात है कि, “बेथलेहेम चर्च 125 वर्षों से कैसे स्थिर खड़ा है ?” परन्तु यह पूछना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है कि, “हम यह कैसे मान लें कि वह अनुग्रह जिसने उस चर्च को सम्भाले रखा हमारे जीवनों में भी भविष्य में विजयी होगा ?” आप यह कैसे कह सकते हैं कि यह अनुग्रह आपको अन्त तक उस विश्वास तथा पवित्रता मॆं बनाए रखेगा जो आपको सुरक्षित स्वर्ग पहुंचाएंगे ।

शेष पाठ इसी को समझाता है। उत्तर है: परमेश्वर के चुने हुओं को सम्भालने वाला अनुग्रह सर्वश्रेष्ठ अनुग्रह है। अर्थात, सम्भालने वाला अनुग्रह सर्वशक्तिमान अनुग्रह है। यह वह अनुग्रह है जो समस्त बाधाओं को पार करता है और उस विश्वास तथा पवित्रता को बनाए रखता है जिससे हम स्वर्ग पहुंचते हैं। भविष्य के लिए हमारी यह एक पक्की निश्चयता है। आप और मैं, अपने आप मॆं, बिल्कुल चचंल और अविश्वसनीय हैं। यदि दृड़ बने रहने के लिए हमें हमारी अपनी शक्ति पर छोड़ दिया जाए तो हमारे विश्वास की नांव निश्चय डूब जाएगी। इसीलिए सदियों से संतगण यह प्रार्थना करते आए हैं -

हम उस अनुग्रह के कैसे कर्ज़दार हैं
मैं उसका ऋणी होने पर बाध्य हूं!
तेरी भलाई मेरे भटके दिल को
बॆड़ियों सा बांधने पाए;
मेरा दिल भटकता ही रहता है, प्रभु मैं उसे महसूस करता हूं,
उस परमेश्वर को छोड़ना चाहता है जिससे मैं प्रेम करता हूं;
यह मेरा दिल है, उसे ले और मुहरबंद कर;
तेरे भवन के लिए उसे मुहरबंद कर।

संतों को क्या इसी रीति से प्रार्थना करना चाहिए? क्या आपके और बैतलहम के भविष्य के लिए इस रीति से प्रार्थना करना चाहिए?

क्या यह बाइबल के अनुसार है? अपनी भलाई को एक बन्धन, एक बेड़ी के समान बनाएं जो मेरे भटकते मन को आपके साथ बान्धे रखे। मेरे हृदय पर स्वर्ग के आंगनों के अटूट बन्धन की मुहर लगाएं। दूसरे शब्दों में: मुझे सम्भालें! मुझे सुरक्षित रखें! प्रत्येक उठते विद्रोह को हराएं। प्रत्येक तुच्छ सन्देह को दूर करॆं! प्रत्येक विनाशकारी प्रलोभन से बचाएं। प्रत्येक घातक प्रलोभन को दूर करें। प्रत्येक शैतानी धोखे को अनावृत करें। प्रत्येक अहंकारी तर्क को पराजित करें! मुझे रूप दें! मुझे लगाव दें। मुझे थामें! मुझ पर नियंत्रण करें! जब तक प्रभु यीशु न आए या मुझे स्वर्ग न बुलाए आप पर भरोसा करने तथा आपका भय मानने के लिए जो कुछ करना हो वह आप करें। क्या हमें इस रीति से गाना चाहिए?

बाइबल पाठ के अनुसार उत्तर है – “हां”। इस प्रकार का गाना या प्रार्थना करना सर्वश्रेष्ठ, सम्भालने वाले अनुग्रह की नई वाचा की प्रतिज्ञा पर आधरित है। हम इसे पढ़े। इसे स्मरण रखें। यह उस नई वाचा की पुराना नियम की अनेक प्रतिज्ञाओं में से एक है जिसके विषय यीशु ने कहा कि उसने उसे उन सब के लिए जो उसके हैं अपने लहू से छाप दी है। यह केवल यहूदियों के लिए नहीं है, परन्तु उनके लिए जो इब्राहीम के वंश मसीह यीशु के साथ एक होने के कारण सच्चे यहूदी हैं (गलतियों 3:7,8)। यिर्मयाह 32:38-41 कहता है,

और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा। मैं उनको एक ही मन और एक ही चाल कर दूंगा कि वे सदा मेरा भय मानते रहें, जिस से उनका और उनके बाद उनके वंश का भी भला हो। मैं उनसे यह वाचा बान्धूंगा, कि मैं कभी उनका संग छोड़कर उनका भला करना न छोडूंगा; और अपना भय मैं उनके मन से ऐसा उपजाऊंगा कि वे कभी मुझ से अलग होना न चाहेंगे। मैं बड़ी प्रसन्नता के साथ उनका भला करता रहूंगा, और सचमुच उन्हें इस देश में अपने सारे मन और प्राण से बसा दूंगा ।

परमेश्वर के सम्भालने वाले अनुग्रह की चार प्रतिज्ञाएं -

परमेश्वर के सम्भालने वाले अनुग्रह की चार प्रतिज्ञाओं पर ध्यान दीजिए।

1. मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा

परमेश्वर हमारा परमेश्वर होने की प्रतिज्ञा करता है। पद 38 “वे मेरे लोग होंगे और मैं उनका परमेश्वर होऊंगा ।” अपनी प्रजा के लिए परमेश्वर की सारी प्रतिज्ञाएं इसमें सारगर्भित हैं, “मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा ।” अर्थात, परमेश्वर के रूप मॆं जो कुछ हूं उस सब का उपयोग करूंगा - मेरी सारी बुद्धि, मेरी सारी सामर्थ और मेरे सारे प्रॆम का - -कि तुम मेरी प्रजा बने रहो। परमेश्वर के रूप में जो कुछ मैं हूं, मैं तुम्हारे भले के लिए लगाऊंगा।

2. परमेश्वर हमारे हृदयों को बदलने की प्रतिज्ञा करता है

परमेश्वर हमारे हृदयों को बदलने तथा हमें उससे प्रॆम करने वाले और उसका भय मानने वाले बनाने की प्रतिज्ञा करना है। पद 39 “और मैं उनको एक ही मन और एक ही मार्ग दूंगा कि वे सदा मेरा भय मानते रहॆं... (पद 40ब) और मैं अपना भय उनके हृदयों में डालूंगा ।” दूसरे शब्दों मॆं, परमेश्वर बस खड़े खड़े यह नहीं देखेगा कि क्या हम अपनी सामर्थ्य में होकर उसका भय रखेंगे? सर्वोच्चता में, श्रेष्ठता मॆं, दया करके हमें वह हृदय देता है जिसकी हमें आवश्यकता है, और हमें वह विश्वास तथा परमेश्वर का भय देता है जो हमें स्वर्ग पहुंचाएगा। यह परमेश्वर का सम्भालने वाला अनुग्रह है (देखिए व्यवस्थाविवरण 30:6; यहेजकेल 11:19-20; 36:27)।

3. परमेश्वर प्रतिज्ञा करता है कि हम उससे कभी विमुख नहीं होंगे

परमेश्वर प्रतिज्ञा करता है कि वह हम से कभी नहीं फिरेगा और हम उस से कभी विमुख नहीं होंगे। पद 40, - “मैं उनके साथ अनन्तकाल की यह वाचा बान्धूंगा कि उनकी भलाई करने से कभी न फिरूंगा और अपना भय उनके हृदयों मॆं डालूंगा जिससे वे मुझ से कभी विमुख न हो ।” दूसरे शब्दों मॆं, उसके हृदय का कार्य इतना शक्तिशाली है कि वह यह आश्वासन देता है कि हम उस से दूर नहीं होंगे । नई वाचा मॆं यही नई बात है। परमेश्वर अपनी सामर्थ द्वारा उन शर्तों को पूरा करने की प्रतिज्ञा करता है जिन्हें हमें पूरी करना है। हमॆं उसका भय मानना है, उससे प्रॆम करना है और उस पर भरोसा रखना है। और वह कहता है, मैं सब कुछ करूंगा । “ मैं अपना भय उनके हृदयों में डालूंगा ” - इसलिए नहीं कि वे इसके कारण क्या करॆंगे, परन्तु इस रीति से कि “वे मुझ से विमुख नहीं होंगे ।” यही परमेश्वर का सम्भालने वाला अनुग्रह है।

4. परमेश्वर यह असीम तीव्रता के साथ करने की प्रतिज्ञा करता है

अन्ततः, परमेश्वर यह कल्पना से परे तीव्रता से करने की प्रतिज्ञा करता है। वह इसे दो रीति से प्रकट करता है। पहली बात पद 41 के आरम्भ में है, “और मैं आनन्दपूर्वक उनकी भलाई करूंगा, और अपने सम्पूर्ण मन और सम्पूर्ण प्राण से सचमुच उन्हें इस देश मॆं स्थापित करूंगा ।” पहले वह कहता है कि आनन्दपूर्वक इस ईश्वरीय सम्भालने वाले अनुग्रह को प्रकट करेगा: “मैं आनन्दपूर्वक उनकी भलाई करूंगा ।” तब वह (पद 41 के अंत में) कहता है कि वह इस ईश्वरीय सम्भालने वाले अनुग्रह को अपने “सम्पूर्ण मन और सम्पूर्ण प्राण से प्रकट करेगा ।”

आपकी भलाई की परमेश्वर कितनी बड़ी अभिलाषा करता है?

वह आपको सम्भालने से प्रसन्न होता है और वह अपने सम्पूर्ण मन और सम्पूर्ण प्राण से प्रसन्न होता है। अब मैं आप से पूछता हूं, उपदेश की किसी अतिशयोक्ति या आडम्बरपूर्ण शब्दों के साथ नहीं, “क्या आप अभिलाषा की किसी भी अन्य तीव्रता से सहमत हो सकते हैं जो कि ‘परमेश्वर के सम्पूर्ण मन और सम्पूर्ण’ सशक्त अभिलाषा से बढकर हो”? मान लें कि आप पृथ्वी भर के समस्त लोगों - लगभग छः अरब - की भोजन, यौन, धन, पद और नाम और धन और मित्र और सुरक्षा की अभिलाषा को लें और एक पात्र मॆं रखें। “परमेश्वर के सम्पूर्ण मन और सम्पूर्ण प्राण” से आपकी भलाई करने की अभिलाषा की तुलना में यह क्या ठहरेगा? यह प्रशान्त महासागर की एक बूंद के समान होगा। क्योंकि परमेश्वर का मन और प्राण असीम हैं। और मनुष्य के मन और प्राण सीमित हैं। परमेश्वर के सम्पूर्ण मन और परमेश्वर के सम्पूर्ण प्राण से बढ़कर कोई तीव्रता नहीं है।

श्रेष्ठ अनुग्रह द्वारा आपको सम्भालने मॆं उसे वह अति आनन्द प्राप्त होता है। “मैं आनन्दपूर्वक उनकी भलाई करूंगा, और अपने सम्पूर्ण मन और सम्पूर्ण प्राण से...। ” आप में से कुछ लोग शायद इस अनुग्रह की मिठास को आज सुबह पहली बार चख रहे होंगे। आपके जीवन में यह पवित्र आत्मा का कार्य है, और मैं आप से आग्रह करूंगा कि इसकी सुनें और परमेश्वर के सम्भालने वाले अनुग्रह की अधीनता को स्वीकार करें।

आप में से कुछ अन्य लोगों ने दशकॊं से इस मधुर निश्चयता मॆं जीवन व्यतीत किया है और आप आज सुबह मेरे साथ हमारे जीवनों में इस भव्य सच्चाई के लिए धन्यवाद दे रहे हैं। मैं आप सभी को निमंत्रित करता हूं कि मेरे साथ मिलकर पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के इस सम्भालने वाले अनुग्रह के लिए गुणगान करें जिसने हमें 125 वर्षों से सुरक्षित रखा है और मसीह यीशु के दुबारा आने तक या हमारी मृत्यु तक हम परमेश्वर के चुने हुओं को सम्भाले रखेगा।

वह अनुग्रह नहीं कि जो सच्चा आनन्द नहीं,
उसे रोके न ही समस्त संकटों से बचाए, परन्तु यह है,
वह अनुग्रह जो हमारे दुख-दर्द को नियोजित करता,
और तब, अन्धकार मॆं हमें सम्भालता है।

हम गीत क्रमांक 9 गाकर प्रभु की स्तुति करें, “पिता की स्तुति गाओ” - और जब हम तीसरे पद में आते हैं, मेरे साथ इस सत्य में आनंदित हों कि आत्मा जिलाता है, मनाता है, और अधीन बनाता और मुहरबंद करता है, और हमें परमेश्वर के समक्ष निर्दोष खड़ा करता है।

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